International Journal of Advanced Educational Research


ISSN: 2455-6157

Vol. 3, Issue 1 (2018)

मध्यकालीन भक्ति संतो में मीराबाई

Author(s): पवन कुमार
Abstract: मध्यकालीन भारत में धार्मिक जीवन के क्षेत्र में एक नई लेकिन महत्वपूर्ण चेतना का विकास हुआ । यह नई चेतना भक्ति के सिद्धान्त से ली गई है भेक्ति को हिन्दु धर्म मं मौक्ष प्राप्ति का साधन माना जाता है। भक्ति का अर्थ प्रेम सहित अपने अराध्य देव को स्वयं केो सर्मपित कर उसकी स्तूति करने से लिया जाता है। विभिन्न सम्प्रदायों ने अपने अपने ईष्टदेव को प्रसन्न करने के लिये अनेक पदों की रचना की है। मध्यकालीन संतों में मीराबाई एक ऐसी सन्त थी जो कृष्ण भक्ति के संतों में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। प्रस्तुत लेख में मीराबाई के बारे में एवं उनकी भक्ति भावना के बारे में जानने का प्रयास किया गया है।
Pages: 228-229  |  1247 Views  811 Downloads
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