International Journal of Advanced Educational Research


ISSN: 2455-6157

Vol. 3, Issue 2 (2018)

भारत-अमेरिका सम्बन्ध: बदलते वैश्विक परिदृश्य के संदर्भ में

Author(s): डाॅ0 राकेश कुमार
Abstract: वैश्वीकरण के दौर में राष्ट्रीय हित, भू-राजनैतिक अवस्थिति, जियो-साइकोलाॅजी तथा विकास व शांति से संबंधित प्रासंगिक निर्णय किसी भी देश की विदेश-नीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। वर्तमान के वैश्विक राजनीतिक समीकरण में विश्व की दो सार्थक लोकतांत्रिक शक्तियों के मध्य न केवल राजनैतिक बल्कि आर्थिक, सांस्कृतिक, सामाजिक तथा रणनीतिक क्षेत्र में विभिन्न साझेदारियों के माध्यम से संबंध स्थापित हो रहे हैं। ये संबंध भारत और अमेरिका के मध्य सामरिक भागीदारी के साथ-साथ स्वतंत्रता के साझा मूल्यों, सार्वभौमिक मानवाधिकारों, सहिष्णुता व बहुलवाद न्याय, रचनात्मक निःशस्त्रीकरण के क्षेत्र में स्थापित हो रहे हैं। वर्तमान में भारत की बढ़ती वैश्विक शक्ति, तीव्र आर्थिक विकास तथा गुटनिरपेक्षता की नीति को देखते हुए अमेरिका इसे नजरअंदाज नहीं कर सकता है। साथ ही भारत के लिए यह समय सबसे महत्वपूर्ण है। जब वह अमेरिका से तकनीकी क्षमता प्राप्त कर सकता है। इस प्रकार जितनी जरूरत भारत को अमेरिका की है उतनी ही जरूरत अमेरिका को भारत की है, क्योंकि दोनों ही देश वैश्विक स्तर पर शांति, स्थिरता, समृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए दोनों देशों के मध्य द्विपक्षीय सम्बन्धों का प्रासंगिक विकास समय की जरूरत हैं, क्योंकि दोनों देशों का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रहित को प्रधानता देते हुए बहुआयामी सांस्कृतिक एवं आर्थिक साझे पक्षों के मध्य बढ़ावा देना हैं।
Pages: 588-589  |  1253 Views  358 Downloads
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