International Journal of Advanced Educational Research

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ISSN: 2455-6157

Vol. 3, Issue 5 (2018)

छायावादी काव्य में भाषा-शिल्प का निरूपण

Author(s): डाॅ0 कंचनलता सिंह
Abstract: काव्य का एक पक्ष है अनुभूति दूसरा हैै अभिव्यक्ति। दूसरे शब्दों में इसे शब्द पक्ष और शैली पक्ष भी कहा जाता है। विचारों और भावों का उदात्त होना तो श्रेष्ठ काव्य के लिए अनिवार्य है कि किन्तु भाषा शिल्प की कामनीयता तो भी नकारा नहीं जा सकता। हमारे भाव संवेदना प्रेषणीकरण अभिव्यंजना पर ही निर्भर है। छायावाद का केवल अंतरंग ही गरिमामय नहीं है। उसका बहिरंग भी उतना ही आकर्षक और दृष्टव्य है। छायावाद की शिल्प विशेषताओं को देखकर ही आचार्य शुक्ल जी ने उसे अभिव्यंजना की एक शैली मात्र कह दिया था जबकि छायावाद में कथ्य की सशक्तता भी है और शिल्पगत् वैशिष्ट्य ही।
Pages: 47-49  |  757 Views  540 Downloads
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