International Journal of Advanced Educational Research

International Journal of Advanced Educational Research


International Journal of Advanced Educational Research
International Journal of Advanced Educational Research
Vol. 3, Issue 6 (2018)

चित्रकूट धाम : सती अनुसुइया आश्रम की तीर्थ यात्रा एवं पर्यटन का भौगोलिक अध्ययन


डाॅ0 जितेन्द्र सिंह

सती अनुसुइया आश्रम चित्रकूट धाम का एक पवित्र एवं धार्मिक सिद्ध स्थल माना जाता है। इस आश्रम का सौन्दर्य एवं भव्यता दर्शनीय है। आश्रम के सामने कल-कल बहती हुई मंदाकिनी नदी की धारा नदी के दोनों तटों पर कतारबद्ध रूप से खड़े ऊँचे-ऊँचे वृक्ष यहाँ के सौन्दर्य को और अधिक बढ़ा देते है। आश्रम में प्रवेश करतेे ही बड़े बाबा का समाधि स्थल स्थित है। मुख्य मन्दिर का सौन्दर्य अद्वितीय है। सती अनुसुइया अपनी माँ देवहुती, पिता श्री करदम, ऋषि भाई कपिल और नौ बहनों के साथ दिखाई देती है। अगले चित्र में अत्रिमुनि के साथ माता अनुसुइया के विवाह का चित्रण किया गया है। तीसरी तस्वीर में माता अनुसुइया जी का पति की आज्ञा से पानी लेने जाने का दृश्य अंकित है। चैथे दृश्य में माता अनुसुइया की कृपा से मंदाकिनी गंगा के अवतरण को दिखाया गया है। पाँचवेें चित्र में माता अनुसुइया द्वारा सती नर्मदा के उद्वार का चित्रण किया गया है। छठवे दृश्य में त्रिदेव ब्रम्हा, विष्णु, महेश भिक्षुवेश में माता से भोजन माँगने का दृश्य अंकित है। इसके साथ ही त्रिदेवों को बालक रूप में पालने पर झुलाते हुए का दृश्य अंकित है। इसके पश्चात् त्रिदेवियों द्वारा अपनी भूल से पति वियोग में परेशान एवं माँ से क्षमा माँगने का दृश्य प्रस्तुत है। माता अनुसुइया, उमा, रमा एवं शारदा को उनकी भूल पर क्षमा करती है एवं उन्हें सुहाग का दान देती है। इसके अतिरिक्त इसमें आश्रम अनुसुइया माता द्वारा सीता जी को पतिव्रत धर्म को बताने तथा दत्तात्रेय चन्द्रमा एवं दुर्वाशा ऋषि को तप में लीन दिखाया गया है। इस आश्रम से लगे हुये लम्बे हाल का दृश्य आलौकिक है। इस हाल का सौन्दर्य देखने पर राजा, महाराजाओं की कोठियो का सौन्दर्य फीका दिखाई देता है।
Pages : 50-51 | 1524 Views | 265 Downloads